पार्टी पॉलिटिक्स संवाददाता, दिल्ली। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख नेता अजीत पवार (Ajit Pawar) की 28 जनवरी 2026 को बारामती एयरपोर्ट के पास एक विमान दुर्घटना में हुई दुखद मौत ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। यह घटना न केवल महाराष्ट्र की राजनीति (Maharashtra Politics) में बड़े बदलाव का संकेत दे रही है, बल्कि एनसीपी के भविष्य, शरद पवार (Sharad Pawar) के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) के साथ संभावित विलय की चर्चाओं और परिवार की एकता पर भी गहरा सवाल खड़ा कर रही है। अजीत पवार की यह मौत भारतीय राजनीति में विमान दुर्घटनाओं की उस लंबी कड़ी में जुड़ गई है, जिसमें कई प्रमुख नेताओं ने असमय अपनी जान गंवाई और जिसने पार्टियों, गठबंधनों तथा राज्य की सियासत को गहराई से प्रभावित किया।
देश में इन विमान दुर्घटनाओं के कारण बड़े राजनीतिक बदलाव हुए हैं, पार्टियां कमजोर या मजबूत हुईं हैं, परिवारों और गठबंधनों की दिशा भी बदली है। अजीत पवार की मौत की ताजा घटना से भी महाराष्ट्र की सियासत में नया मोड़ आ सकता है, जहां एनसीपी का भविष्य और महाराष्ट्र के सत्ता समीकरण अनिश्चित हो गए हैं।
आइए यहां नजर डालते हैं भारत में विमान/ हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं में मारे गए प्रमुख राजनेताओं पर...
1. अजित पवार (28 जनवरी 2026)
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार (66 वर्ष) की मौत एक निजी चार्टर्ड लियरजेट 45 विमान (VT-SSK) के बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान क्रैश होने से हुई। विमान मुंबई से बारामती जा रहा था, जहां वे जिला परिषद चुनावों के लिए चार रैलियों को संबोधित करने वाले थे। विमान में कुल पांच लोग सवार थे: अजित पवार, उनके पीएसओ जाधव, फ्लाइट अटेंडेंट पिंकी माली और दो पायलट (कपूर और पाठक)। सभी की मौके पर ही मौत हो गई।
फ्लाइटराडार 24 के अनुसार, विमान सुबह 8:10 बजे मुंबई से उड़ा और 35 मिनट बाद 8:45 बजे के आसपास रडार से गायब हो गया। लैंडिंग के दूसरे प्रयास के दौरान रनवे से पहले सौ फीट की दूरी पर विमान क्रैश हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया गया कि विमान शोर करते हुए रनवे से फिसल गया और बड़ा विस्फोट हुआ, कई और धमाके भी हुए। लोगों ने यात्रियों को निकालने की कोशिश की, लेकिन असफल रहे।
राजनीतिक प्रभाव: अजित पवार 2023 में एनसीपी से अलग होकर भाजपा-शिवसेना गठबंधन (BJP-Shivsena Alliance) में शामिल हुए थे और उनकी पार्टी को चुनाव आयोग ने आधिकारिक एनसीपी माना था। उनकी मौत से पार्टी में नेतृत्व संकट पैदा हो गया है। शरद पवार के साथ विलय की हालिया चर्चाएं रुक गई हैं। अब उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार और चचेरी बहन सुप्रिया सुले पर जिम्मेदारी आ सकती है। उनके निधन पर महाराष्ट्र सरकार ने तीन दिनों का राजकीय शोक घोषित किया है। उनका अंतिम संस्कार 29 जनवरी को बारामती में पूरे राजकीय सम्मान के साथ होगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह शामिल होने वाले हैं। उनके निधन पर कई नेताओं ने शोक जताया है। घटना की जांच की मांग भी उठ रही है।
2. विजय रूपाणी (12 जून 2025)
गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी (भाजपा) की मौत एयर इंडिया फ्लाइट 171 (बोइंग 787 ड्रीमलाइनर) के अहमदाबाद एयरपोर्ट से टेकऑफ के कुछ मिनट बाद क्रैश होने से हुई। विमान में 242 लोग सवार थे (230 यात्री, 10 क्रू और दो पायलट), जिनमें एक ब्रिटिश नागरिक को छोड़कर शेष 241 की मौत हो गई। रूपाणी अपनी बेटी से मिलने विमान से लंदन जा रहे थे। विमान एक मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल पर गिरा, जिससे कई स्थानीय लोगों की भी मौत हो गई।
राजनीतिक प्रभाव: रूपाणी 2016-2021 तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे थे। पाटीदार आंदोलन के बाद उन्होंने पार्टी को स्थिर किया और 2017 में सत्ता में वापस लाए। हालांकि, एंटी-इनकंबेंसी के कारण 2021 में हटा दिए गए थे। मौत के समय वे राज्य की राजनीति से दूर थे। तब वे भाजपा के पंजाब-चंडीगढ़ प्रभारी थे।
3. दोरजी खांडू (30 अप्रैल 2011)
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री दोरजी खांडू (कांग्रेस) की मौत तवांग से उड़ान भरने के तुरंत बाद खराब मौसम में सिंगल-इंजन हेलीकॉप्टर के क्रैश से हुई। हेलीकॉप्टर 14,000 फीट की सेला पास पार करते हुए चट्टान से टकराया।
राजनीतिक प्रभाव: खांडू कांग्रेस नेता थे। उनके बेटे पेमा खांडू ने 2016 में भाजपा की सदस्यता ली थी। वर्तमान में वे अरुणाचल के मुख्यमंत्री हैं।
4. वाई एस राजशेखर रेड्डी (2 सितंबर 2009)
आंध्र प्रदेश मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी (वाईएसआर, कांग्रेस) की मौत बेल 430 हेलीकॉप्टर के नल्लमाला जंगल में क्रैश से हुई। हेलीकॉप्टर का मलबा 24 घंटे बाद मिला। दुर्घटना में वाईएसआर सहित पांच लोगों की मौत हुई।
राजनीतिक प्रभाव: वाईएसआर ने कांग्रेस को दो लगातार जीत दिलाईं। उनकी मौत के बाद कई प्रशंसकों ने आत्महत्या की कोशिश की। तेलंगाना आंदोलन तेज हुआ। राज्य में कांग्रेस कमजोर हुई (2014 में 156 से 21 सीटें)। उनके बेटे जगन मोहन रेड्डी ने अलग पार्टी बनाई और 2019-2024 तक राज्य पर शासन किया।
5. ओ पी जिंदल और सुरेंद्र सिंह (2005)
हरियाणा के पावर मंत्री ओम प्रकाश जिंदल और कृषि मंत्री सुरेंद्र सिंह (कांग्रेस सरकार में) की मौत चंडीगढ़ से दिल्ली जा रहे हेलीकॉप्टर के सहारनपुर में क्रैश से हुई।
राजनीतिक प्रभाव: कांग्रेस सरकार पर असर पड़ा, लेकिन सीमित।
6. जी एम सी बालयोगी (3 मार्च 2002)
लोकसभा स्पीकर और टीडीपी नेता जी एम सी बालयोगी की मौत भिमावरम से आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में हेलीकॉप्टर के तालाब में क्रैश से हुई (तकनीकी खराबी)।
राजनीतिक प्रभाव: उनके बेटे जी एम हरिश अब अमलापुरम से टीडीपी सांसद हैं।
7. माधवराव सिंधिया (30 सितंबर 2001)
वरिष्ठ कांग्रेस नेता माधवराव सिंधिया की मौत कानपुर रैली जाते समय 10-सीटर विमान के मैनपुरी के पास क्रैश से हुई।
राजनीतिक प्रभाव: कांग्रेस में खालीपन, लेकिन बेटे ज्योतिरादित्य ने भर दिया (अब भाजपा में, केंद्रीय मंत्री)।
8. संजय गांधी (23 जून 1980)
कांग्रेस नेता संजय गांधी (इंदिरा गांधी के बेटे) की मौत दिल्ली में स्टंट फ्लाइंग के दौरान विमान क्रैश से हुई।
राजनीतिक प्रभाव: राजीव गांधी राजनीति में आए। कालक्रम में संजय की पत्नी मेनका गांधी और बेटे वरुण गांधी पार्टी एवं परिवार से अलग हुए। वरुण अब भाजपा में हैं। माना जाता है कि अगर संजय जीवित रहते, तो आपातकाल का दाग और गहरा होता।






